सशस्त्र बल (विशेष शक्तियाँ) अधिनियम, 1958 (AFSPA)
पाठ्यक्रम: GS-2 / राजव्यवस्था एवं शासन
संदर्भ
- केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने घोषणा की कि वर्ष 2027 तक पूर्वोत्तर भारत के लगभग पूरे क्षेत्र से सशस्त्र बल (विशेष शक्तियाँ) अधिनियम (AFSPA) को वापस लिए जाने की संभावना है, केवल एक या दो राज्यों को छोड़कर।
AFSPA क्या है?
- सशस्त्र बल (विशेष शक्तियाँ) अधिनियम, 1958 सशस्त्र बलों को उन क्षेत्रों में कार्यवाही करने का अधिकार प्रदान करता है जिन्हें “अशांत क्षेत्र” घोषित किया गया हो।
- यह अधिनियम सार्वजनिक व्यवस्था बनाए रखने तथा उग्रवाद एवं विद्रोह से निपटने के लिए सुरक्षा बलों को विशेष शक्तियाँ प्रदान करता है।
- प्रमुख प्रावधान : किसी राज्य का राज्यपाल, किसी केंद्रशासित प्रदेश का प्रशासक, अथवा केंद्र सरकार किसी क्षेत्र को “अशांत क्षेत्र” घोषित कर सकती है।
- यह अधिनियम सशस्त्र बलों को विशेष शक्तियाँ प्रदान करता है, जिनमें शामिल हैं—
- बल प्रयोग करना (निर्धारित परिस्थितियों में मृत्यु कारित करने तक),
- बिना वारंट गिरफ्तारी,
- बिना वारंट तलाशी,
- हथियारों के भंडार अथवा उग्रवादियों के ठिकानों का विनाश।
- AFSPA के अंतर्गत की गई कार्रवाई के लिए सशस्त्र बलों के कर्मियों के विरुद्ध केंद्र सरकार की पूर्व स्वीकृति के बिना कोई अभियोजन, वाद अथवा अन्य कानूनी कार्यवाही प्रारंभ नहीं की जा सकती।
- यह अधिनियम सशस्त्र बलों को विशेष शक्तियाँ प्रदान करता है, जिनमें शामिल हैं—
AFSPA पर प्रमुख समितियाँ
- न्यायमूर्ति बी.पी. जीवन रेड्डी समिति (2005): समिति ने AFSPA को निरस्त करने की अनुशंसा की।
- इसके आवश्यक प्रावधानों को गैरकानूनी गतिविधियाँ (निवारण) अधिनियम [UAPA], 1967 में सम्मिलित करने का सुझाव दिया।
- साथ ही, शिकायत निवारण एवं जवाबदेही तंत्र को अधिक सुदृढ़ बनाने की अनुशंसा की।
- संतोष हेगड़े आयोग (2013): आयोग ने पाया कि मणिपुर में जाँच किए गए छह मुठभेड़ मामलों में से कोई भी वास्तविक नहीं था।
- इसने AFSPA के प्रावधानों के दुरुपयोग को रेखांकित किया।
- आयोग ने अधिक जवाबदेही तथा अधिनियम की समय-समय पर समीक्षा की अनुशंसा की।
- द्वितीय प्रशासनिक सुधार आयोग (2007): आयोग ने AFSPA को निरस्त करने की अनुशंसा की।
- आयोग का मत था कि यह अधिनियम प्रभावित क्षेत्रों में भेदभाव एवं अलगाव का प्रतीक बन गया है।
स्रोत: द हिंदू (TH)
सर्वोच्च न्यायालय द्वारा POCSO दोषसिद्धि निरस्त करने हेतु अनुच्छेद 142 का प्रयोग
पाठ्यक्रम: GS-2 / राजव्यवस्था एवं शासन
संदर्भ
- सर्वोच्च न्यायालय ने संविधान के अनुच्छेद 142 के अंतर्गत प्राप्त अपनी असाधारण शक्तियों का प्रयोग करते हुए यौन अपराधों से बच्चों का संरक्षण अधिनियम, 2012 (POCSO Act) के अंतगर्त दोषी ठहराए गए एक व्यक्ति की दोषसिद्धि को निरस्त कर दिया।
भारतीय संविधान का अनुच्छेद 142
- भारतीय संविधान का अनुच्छेद 142 सर्वोच्च न्यायालय को किसी लंबित मामले में “पूर्ण न्याय” सुनिश्चित करने हेतु आवश्यक आदेश या डिक्री पारित करने की असाधारण शक्ति प्रदान करता है।
- इसका उद्देश्य विधिक प्रावधानों में विद्यमान रिक्तताओं को भरना तथा ऐसी परिस्थितियों में न्यायसंगत राहत प्रदान करना है जहाँ कानून का कठोर अनुप्रयोग अन्यायपूर्ण परिणाम उत्पन्न कर सकता हो।
POCSO अधिनियम क्या है?
- यौन अपराधों से बच्चों का संरक्षण अधिनियम (POCSO Act), 2012 को महिला एवं बाल विकास मंत्रालय द्वारा बच्चों को यौन शोषण एवं यौन उत्पीड़न से संरक्षण प्रदान करने के उद्देश्य से लागू किया गया था।
- यह अधिनियम निम्नलिखित अपराधों को दंडनीय बनाता है—
- प्रवेशी यौन हमला,
- गैर-प्रवेशी यौन हमला,
- यौन उत्पीड़न,
- बाल अश्लीलता ।
- यह अधिनियम 18 वर्ष से कम आयु के सभी बच्चों पर लागू होता है।
- POCSO एक लिंग-तटस्थ कानून है तथा यह मानता है कि नाबालिग यौन गतिविधियों के लिए वैध सहमति नहीं दे सकते।
- यह अधिनियम बाल-अनुकूल न्यायिक प्रक्रियाएँ सुनिश्चित करता है, जिनमें शामिल हैं—
- विशेष न्यायालय,
- बंद कक्ष में सुनवाई ,
- वीडियो रिकॉर्ड की गई गवाही।
- यह अधिनियम यौन उद्देश्यों से बाल तस्करी में संलिप्त व्यक्तियों को भी दंडित करता है तथा अपराध की गंभीरता के आधार पर कठोर दंड का प्रावधान करता है।
स्रोत: द हिंदू (TH)
केरल में शिगेलोसिस का प्रकोप
पाठ्यक्रम: GS-2 / स्वास्थ्य
संदर्भ
- केरल में जून 2026 तक शिगेलोसिस (बेसिलरी पेचिश) के 85 पुष्ट मामले तथा 70 से अधिक संभावित मामले दर्ज किए गए हैं।
शिगेलोसिस क्या है?
- शिगेलोसिस एक अत्यंत संक्रामक जीवाणुजनित संक्रमण है, जो शिगेला वंश के जीवाणुओं द्वारा उत्पन्न होता है।
- यह मुख्य रूप से आंतों को प्रभावित करता है तथा बेसिलरी पेचिश का कारण बनता है, जिसकी प्रमुख विशेषता गंभीर दस्त है।
- लक्षण:
- बुखार
- दस्त (अक्सर रक्त अथवा श्लेष्मा/म्यूकस के साथ)
- उल्टी एवं मतली
- पेट में ऐंठन एवं दर्द
- कमजोरी तथा निर्जलीकरण
- संचरण:
- दूषित भोजन एवं जल के सेवन से।
- मल-मुख (Fecal-Oral) मार्ग के माध्यम से व्यक्ति-से-व्यक्ति संपर्क द्वारा।
स्रोत: द हिंदू (TH)
हिमार्स(HIMARS)
पाठ्यक्रम: GS-3 / रक्षा
संदर्भ
- ताइवान ने हाल ही में ताइवान जलडमरूमध्य में हाई मोबिलिटी आर्टिलरी रॉकेट सिस्टम (HIMARS) का उपयोग करते हुए अपना प्रथम प्रत्यक्ष सैन्य अभ्यास किया। यह अभ्यास संभावित चीनी सैन्य खतरे के विरुद्ध रक्षा परिदृश्य का अनुकरण करने के उद्देश्य से आयोजित किया गया था।
HIMARS के बारे में
- हाई मोबिलिटी आर्टिलरी रॉकेट सिस्टम (HIMARS) अमेरिका द्वारा आपूर्ति की गई एक मोबाइल रॉकेट तोपखाना प्रणाली है, जिसका निर्माण लॉकहीड मार्टिन द्वारा किया जाता है।
- यह छह पहियों वाले ट्रक पर स्थापित होती है, जिससे इसे सड़कों तथा दुर्गम भू-भागों पर तीव्र गति से संचालित किया जा सकता है।
- यह प्रणाली अपनी “शूट एंड स्कूट” क्षमता के लिए प्रसिद्ध है, जिसके अंतर्गत यह रॉकेट दागने के तुरंत बाद अपना स्थान बदल सकती है, जिससे शत्रु के जवाबी हमलों से बचाव संभव होता है।
- लगभग 300 किलोमीटर की मारक क्षमता के साथ HIMARS ताइवान जलडमरूमध्य के पार स्थित लक्ष्यों पर प्रहार कर सकती है, जिनमें चीन के फ़ुज़ियान प्रांत के तटीय क्षेत्र भी शामिल हैं।
क्या आप जानते हैं?
- रूस-यूक्रेन संघर्ष के दौरान HIMARS का व्यापक उपयोग किया गया है।
- यह यूक्रेन की प्रमुख दीर्घ-दूरी प्रहार प्रणालियों में से एक के रूप में उभरी है।
स्रोत: CNN
एपिक्लोरोहाइड्रिन
पाठ्यक्रम: GS-3 / विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी
संदर्भ
- भारत ने एपिक्लोरोहाइड्रिन नामक कागज़ को मजबूत बनाने वाले रसायन तथा चाय बैगों के निर्माण में प्रयुक्त क्लोरीन ब्लीचिंग के उपयोग पर प्रतिबंध लगा दिया है। एपिक्लोरोहाइड्रिन को संभावित कैंसरकारी पदार्थ के रूप में वर्गीकृत किया गया है।
एपिक्लोरोहाइड्रिन के बारे में
- एपिक्लोरोहाइड्रिन एक रासायनिक पदार्थ है, जिसका उपयोग सामान्यतः कागज़ निर्माण उद्योग में कागज़ की सुदृढ़ता एवं सततता बढ़ाने के लिए किया जाता है।
- इसका उपयोग चाय बैग के कागज़ के निर्माण में किया जाता रहा है, ताकि उबालने या चाय बनाने की प्रक्रिया के दौरान वे फटने से सुरक्षित रहें।
- अंतरराष्ट्रीय कैंसर अनुसंधान संस्था (IARC) ने एपिक्लोरोहाइड्रिन को “संभवतः मनुष्यों के लिए कैंसरकारी” श्रेणी में वर्गीकृत किया है।
- यह चिंता व्यक्त की गई है कि जब चाय बैगों को गर्म जल में डुबोया जाता है, तब इस रसायन के अवशेष पेय पदार्थ में मिल सकते हैं।
- इस प्रतिबंध का उद्देश्य खाद्य-संपर्क सामग्री में उपस्थित खतरनाक रसायनों के दीर्घकालिक संपर्क से उत्पन्न संभावित स्वास्थ्य जोखिमों को कम करना है।
स्रोत: Mint
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